ये क्या कर रही है RSS ?, गीता का अपमान ?

ये क्या कर रही है RSS ?, गीता का अपमान ?

पिछले कुछ दिनों से कहा जा रहा है की मोदी सरकार स्कूलो में श्रीमदभगवद गीता पढ़ाने जा रही हैं |

परन्तु गीता पढ़ाने वालो को पहले स्वयं गीता पढ़नी चाहिए, क्योंकि जिनमे श्रद्धा और विवेक नहीं है वह मनुष्य ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता और ऐसे लोगो को गीता पढ़ा कर गीता का अपमान करना नहीं है तो क्यां हैं ? मैं भी स्वयं RSS और BJP का कार्यकर्ता हूं पर इस मामले का मैं पुरजोर विरोध करता हूँ |

क्योंकि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण इस की अनुमति नहीं देते,

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन । न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥

गीता अध्याय 18 श्लोक 67,

अर्थात, तुझे यह गीत रूप रहस्यमय उपदेश किसी भी काल में न तो तपरहित मनुष्य से कहना चाहिए, न भक्ति-(वेद, शास्त्र और परमेश्वर तथा महात्मा और गुरुजनों में श्रद्धा, प्रेम और पूज्य भाव का नाम 'भक्ति' है।)-रहित से और न बिना सुनने की इच्छा वाले से ही कहना चाहिए तथा जो मुझमें दोषदृष्टि रखता है, उससे तो कभी भी नहीं कहना चाहिए॥67॥

नातपस्काय :- अभिप्राय यह हैँ की यह गीताशास्त्र बडा ही गुप्त रखनेयोग्य विषय हैँ, अत: जो मनुष्य स्वधर्मपालनरुप तप करनेवाला न हो, भोगोँकी आसत्किके कारण सांसारीक विषय सुखके लोभसे अपने धर्मका त्याग करके पापकर्मो मे प्रवृत हो ऐसे मनुष्य को तत्त्वके वर्णन से भरपुर यह गीताशास्र नही सुनाना चाहिये, इससे इस उपदेश का और भगवान का भी अनादर होगा ।

नाभक्ताय :- जो परमेश्वर मेँ विश्र्वास, प्रेम और पुज्य भाव नहीँ रखता; ऐसे नास्तिक मनुष्यको भी यह अत्यन्त गोपनीय गीताशास्त्र नही सुनाना चाहीये,

न चाशुश्रूषवे :- जिसकी गीताशास्त्र मेँ श्रद्दा और प्रेम न होनेके कारण वह उसे सुनना न चाहता हो, तो उसे भी यह परम गोपनिय शास्त्र नहीँ सुनाना चाहीये, इससे भगवान का और उपदेश का अनादर होता हैँ...।

योऽभ्यसुयति :- परमेश्वर मेँ जिसकी दोषदृष्टि हैँ, जो परमेश्वर के गुणोँमेँ दोषारोपण करके परमेश्वर की निन्दा करनेवाला हैँ ऐसे मनुष्य को तो कीसी भी हालत मेँ यह उपदेश नहीँ सुनाना चाहिये; क्योँकी वह भगवान के गुण, प्रभाव और ऐश्वर्यको न सह सकनेके कारण इस उपदेशको सुनकर भगवान की पहलेसे भी अधिक अवज्ञा करेगा,

 

तो अगर एक कक्षा की बात की जाये तो वहा पर विभिन्न धर्म तथा संप्रदाय के बच्चे पढ़ने आते हैं, उनमे कुछ हिन्दू, सिख तथा जैन बच्चो को छोड़ दिया जाये तो ज्यादातर मुस्लिम, इसाई और निरईश्वरवादी बुद्ध होते हैं,

वे भगवान को गाली देते हैं और ऐसे लोगो को गीता पढ़ा कर गीता का अपमान कराना नहीं है तो क्यां हैं ? ऐसे बच्चे जो मांस खानेवाले हैं या फिर हिंसक है वह ये बाते नहीं समझ सकते क्योंकि

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते । तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति ॥

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । ज्ञानं लब्धवा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥

अज्ञश्चश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति । नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः ॥

गीता अध्याय 4 श्लोक 38 से 40,

अर्थात, इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला निःसंदेह कुछ भी नहीं है। उस ज्ञान को कितने ही काल से कर्मयोग द्वारा शुद्धान्तःकरण हुआ मनुष्य अपने-आप ही आत्मा में पा लेता है ॥38॥

जितेन्द्रिय, साधनपरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के- तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप परम शान्ति को प्राप्त हो जाता है॥39॥

विवेकहीन और श्रद्धारहित संशययुक्त मनुष्य परमार्थ से अवश्य भ्रष्ट हो जाता है। ऐसे संशययुक्त मनुष्य के लिए न यह लोक है, न परलोक है और न सुख ही है ॥40॥

 

 जो निरईश्वरवादी दलित बौद्धधर्मी लोग कहते की तुम्हारे कृष्ण ने तो गोपियों को नग्न देखा था, ये कैसा भगवान है ?

और विडम्बना ये है की उन लोगो को भी गीता पढाई जायेगी, जो बार बार भगवान को गालिया देते आये है, और आगे भी करते रहेंगे जो क्रूरकर्मी नराधम लोगो को छोड़ दो पर जो अपने हिन्दू है वे भी गीता समझते तो यु मांस नहीं खाया करते,

एक श्लोक क्या सुनाया तो मुह बनाने लगते हैं,

ये गीता शास्त्र कितना गोपनीय है इसके कुछ प्रमाण देखते है...

  • स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः । भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्‌ ॥

         (गीता 4-3)

  • तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिए वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझको कहा है क्योंकि यह बड़ा ही उत्तम रहस्य है अर्थात गुप्त रखने योग्य विषय है॥3॥

 

  • इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌ ॥

         (गीता 9-1)

  • तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भली भाँति कहूँगा, जिसको जानकर तू दुःखरूप संसार से मुक्त हो जाएगा,

 

  • राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्‌ । प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम्‌ ॥

         (गीता 9-2)

  • यह विज्ञान सहित ज्ञान सब विद्याओं का राजा, सब गोपनीयों का राजा, अति पवित्र, अति उत्तम, प्रत्यक्ष फलवाला, धर्मयुक्त, साधन करने में बड़ा सुगम और अविनाशी है,

 

 

  • भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः ।

         (गीता 10-1)

  • हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन,

 

  • परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम्‌ ।

         (गीता 14-1)

  • ज्ञानों में भी अतिउत्तम उस परम ज्ञान को मैं फिर कहूँगा,

 

  • इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ ।

         (गीता 15-20)

  • हे निष्पाप अर्जुन! इस प्रकार यह अति रहस्ययुक्त गोपनीय शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया,

 

  • इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुपह्यतरं मया ।

         (गीता 18-63)

  • इस प्रकार यह गोपनीय से भी अति गोपनीय ज्ञान मैंने तुमसे कह दिया,

 

  • सर्वगुह्यतमं भूतः श्रृणु मे परमं वचः ।

         (गीता 18-64)

  • संपूर्ण गोपनीयों से अति गोपनीय मेरे परम रहस्ययुक्त वचन को तू फिर भी सुन,

 

कितनि भी गीता पढ़ लो या पढ़ा लो पर ज्ञान तब प्राप्त होता है जब भगवान देते हैं, और भगवान किस भक्त को ज्ञान देते हैं ?

  • तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्‌ । ददामि बद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते ॥

  • तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः। नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥

        (गीता 10-10 और 11 )

  • उन निरंतर मेरे ध्यान आदि में लगे हुए और प्रेमपूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं वह तत्त्वज्ञानरूप योग देता हूँ, जिससे वे मुझको ही प्राप्त होते हैं॥10॥

  • हे अर्जुन! उनके ऊपर अनुग्रह करने के लिए उनके अंतःकरण में स्थित हुआ मैं स्वयं ही उनके अज्ञानजनित अंधकार को प्रकाशमय तत्त्वज्ञानरूप दीपक के द्वारा नष्ट कर देता हूँ ॥11॥

इसीलिए सरकार से अनुरोध है की गीता का बाजारीकरण ना करे और गीता को यु अपमानित ना करे, इसके बजाय महाभारत और रामायण की कहानिया सुनाये परन्तु बिना सुनने की इच्छा वालो को गीता पढ़ा कर भगवान का अपमान ना करे... इस लेख से आपकी स्वार्थी भावनाओ को ठेस पहुंची हो तो माफ़ करे... और शेयर करे...

 

- एक इश्वरप्रेमी..





{चेतावनी :- इस लेख में हिन्दू धर्म के धर्मग्रन्थ श्रीमदभागवतगीता जी के  प्रमाण लिए गए है तथा  लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं, इस लेख से आपकी स्वार्थी भावनाओँ को ठेस पहुंची हो तो क्षमा करे...सर्वाधार सुरक्षित}

{Produced, Directed & Written By Sarangdhar Ambildhuke }





 

24 Jan 2016