My Profile



NAME : - Sarangdhar Ambildhuke (Baapu)



Study At :- The Philosophy of Spirituality In Shrimad Bhagwad Geeta



Studied At :- Manoharbhai Patel Institution Of Enggineering And Technology, Shahapur



MY LOVE & LIFE At :- Lord Shri Krishna



Member Of :- Rashtriya Swayamsevak Sangh : RSS



§ Education §

Vikas Junior College Kharbi (Naka)

College July 23, 2010 - April 30, 2012

Nanaji Joshi Junior College of Science, Shahapur

High School July 3, 2004 - April 30, 2010



§ Contact Info §

Mobile :-

9637970660

Address :-

Shri Sarwadhnya Telecom & Recharge Center, Kharbi (Naka), Post:- Thana, Petrol Pump, (Jawaharnagar), Tah. Dist. = Bhandara, 441906, Maharashtra, India.



Email :-

sarangdhar14@gmail.com



Birthday :-

February 14, 1995



Political Views :-

Narendra Modi



About Me :-

My Love & Life Is

Lord Shri Krishna,

I Love Lord Shri

Krishna Forever...

श्री भगवान बोलते हैँ...

"तु करता वही हैँ,

जो तु चाहता हैँ ।

पर होता वही हैँ

जो मैँ चाहता हुँ ।

तु वही कर

जो मैँ चाहता हुँ,

फिर होगा वही

जो तु चाहता हैँ...."

हे अर्जुन! तू मुझमें ही मन लगाने वाला हो, मेरा ही भक्त बन, मेरा ही पूजन करने वाला हो और सिर्फ मुझको ही प्रणाम कर। ऐसा करने से तू मुझे ही प्राप्त होगा, यह मैं तुझसे सत्य प्रतिज्ञा से कहता हूँ क्योंकि तू मेरा अत्यंत प्रिय है ॥GEETA 18-65॥


सभी धर्मों का सर्वसंग परीत्याग करके तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान, सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण में आ जा। मैं तुझे संपूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू शोक मत कर ॥GEETA 18-66॥


हे भारत! जो ज्ञानी पुरुष मुझको क्षर और अक्षरो से उत्तम सर्वशक्तीमान तथा अच्युत पद प्रदान करनेवाला परब्रम्ह परमेश्वर के रुप मेँ जानता हैँ वो सब कुछ जाननेवाला पुरुष, सब प्रकार से सिर्फ मेरा ही स्मरण करता हैँ, और सिर्फ मेरी ही भक्ती करता है ॥GEETA 15-19॥


जिसके सम्पूर्ण शास्त्रसम्मत कर्म बिना कामना और संकल्प के होते हैं तथा जिसके समस्त कर्म ज्ञानरूप अग्नि द्वारा भस्म हो गए हैं, उस महापुरुष को ज्ञानीजन भी पंडित कहते हैं ॥GEETA 4-19॥


अत्यन्त विलक्षण तथा मननशिल स्वभाव को प्राप्त हुए पुरुष का संसारके आश्रयसे रहित होकर केवल एक परम प्रेममय भगवान्‌मेँ हीँ अनन्य प्रेम हो जाता हैँ ।

इसलिये उनको भगवान्‌ के गुण, प्रभाव और रहस्य से भरी हुई विशुध्द प्रेमके विषयकी कथाओँका सुनना - सुनाना और मनन करना तथा एकान्त देशमेँ रहकर निरन्तर भगवान्‌का भजन, ध्यान और शास्त्रोँके मर्मका विचार करना ही प्रिय लगता हैँ ।

विषयासक्त मनुष्योँमेँ रहकर हास्य, विलास, प्रमाद, निन्दा, विषयभोग और व्यर्थ वार्तादिमेँ अपने अमुल्य समयका एक क्षण भी बिताना अच्छा नहीँ लगता एवं उनके द्वारा सम्पुर्ण कर्तव्यकर्म भगवान्‌के स्वरुप और नामका मनन रहते हुए ही बिना आसक्तिके केवल भगवदर्थ होते हैँ।

क्योँकी वह मनुष्य अति दुर्लभ मनुष्य शरीरको प्राप्त होकर अपने अमुल्य समयका एक क्षण भी दु:खमूलक क्षणभङुर भोँगोँके भोगनेमेँ नष्ट करना उचित नहीँ समझता...



बनवारी रे जिने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनियावालोँ से क्या काम रे...