बलात्कार "गलत सोच" से होते है, कम कपडे से नहीँ -श्रीमद्भगवत गिता...

बलात्कार एक गलत सोच - गिता

 

कोई कहता हैँ, बलात्कार लडकीयोँ के कम कपडे पहनने से होते हैँ...

कोई कहता हैँ, लडकीयोँ के जिंस, और स्कर्ट पहनने से होता हैँ...

तो कोई कहता हैँ, लडकीयोँको बहार घुमने फिरने से होता हैँ...

राजनेता तो महीला सुरक्षा के वादे पुरे नहीँ कर पाते तो भी लडकी दोषी होती हैँ...

धर्म गुरु तो लडकीयोँ को मर्यादा मेँ रहना सिखाते हैँ...

तो आरोँपीयोँ के वकील लडकीयोँ को ही दोषी करार देते हुयेँ दलिले देते हैँ...

परंतु कोई भगवान के शब्दो पर गौर नहीँ करता...

मुझे तो आश्चर्य होता हैँ की धर्म गुरु भी भगवान श्रीकृष्ण के बातो को नहीँ समझे पायेँ...!

भगवान श्री कृष्णने श्रीमद्भगवतगिता मेँ बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के बारे मेँ प्रत्यक्षरुप से वर्णन नहीँ किया हैँ परंतु समझनेवालेको ईशारा काफी होता हैँ ।

मैँने गिता तत्वज्ञान के मर्म का विचार कर के कुछ बाते ढुंड निकाली हैँ...

ध्यायतो विषयान्पुंसः संगस्तेषूपजायते । संगात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥

{गिता अध्याय - 2, श्लोक - 62 और 63 }

अर्थात, हे अर्जुन ! विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की वासना उत्पन्न होती है और वासना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है ॥2-62॥

क्रोध से अविवेक अर्थात भ्रान्ति निर्माण होती हैँ, भ्रान्ति से स्मृति में भ्रम हो जाता है, स्मृति में भ्रम हो जाने से निश्चयात्मक बुद्धि अर्थात ज्ञानशक्ति का नाश हो जाता है और बुद्धि का नाश हो जाने से यह पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है अर्थात उसका पुर्णता पतन हो जाता हैँ ॥2-63॥

भगवान की बातो को समझे तो बलात्कार की प्रकिया मनसे शुरु होकार बुद्दी और इद्रीयोँ के तृप्तता पर जा कर खतम होती...

(1) विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष :- Mobile तथा TV पर Blue Flim, Hot Scenes, Nude Wallpapers देखना ।

(2) उन विषयों में आसक्ति हो जाती है :- आसक्ति याने बार बार उनको देखने की आदत पड जाना ।

(3) आसक्ति से उन विषयों की वासना उत्पन्न होती है :- आदत पड जाने से उन विषयोँ को अर्थात स्री भोग भोगने की वासना अर्थात इच्छा प्रबल जागृत होना ।

(4) वासना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है :- किसी लडकी तथा Girl Friend के साथ सबंध बनाने पर मना करने के कारण वासना मेँ विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है ।

(5) क्रोध से अविवेक अर्थात भ्रान्ति निर्माण होती हैँ :- अपुर्ण वासना से उत्पन्न हुये क्रोध से अविवेक अर्थात भ्रान्ति यानी सत्य-असत्य का ज्ञान नहीँ रहता ।

(6) भ्रान्ति से स्मृति में भ्रम हो जाता है :- वासना से क्रोध और क्रोध से अविवेक और अविवेक से स्मृति में भ्रम अर्थात स्मरणशक्ती का नाश हो जाता है और वह पुरुष यह भुल जाता हैँ बलात्कार जघन्य अपराधों है। जिसकी सजा उम्रकैद अथवा मौत तक हो सकती है।

(7) स्मृति में भ्रम हो जाने से निश्चयात्मक बुद्धि अर्थात ज्ञानशक्ति का नाश हो जाता है :- स्मरणशक्ती ना होने से मनुष्य विचार करने निश्चयात्मक शक्ति अर्थात ज्ञानशक्ती खो देता है और वासना तृप्ती के लिये प्रयत्न करने लगता हैँ ।

(8) बुद्धि का नाश हो जाने से यह पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है अर्थात उसका पुर्णता पतन हो जाता हैँ :- अर्थात जब बुद्धि का नाश होता हैँ तो वह वासना तृप्ति के लिये बलात्कार जैसे अपराध कर बैठता हैँ...!

तथा लडकी को जिँदा जलाने जैसे जघन्य अपराध से उसका ही पतन होता हैँ ।

यह प्रक्रीया मन से शुरु होती है

इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते । तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ॥

{गिता अध्याय - 2, श्लोक - 67 }

जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है, वह एक ही प्रमथन स्वभाववाली इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है ॥2-67॥

जब वह एक ही प्रमथन स्वभाववाली इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है तब वह पुरष आगे पिछे न सोच कर कुकर्म कर बैठता हैँ ।

लोग कहते हैँ की ज्ञानी और बुद्दिमान पुरष ये अपराध कैसे कर सकते हैँ, परन्तु उसका जवाब भी हैँ...

यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः । इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः ॥

{गिता अध्याय - 2, श्लोक - 60 }

हे अर्जुन! आसक्ति का नाश न होने के कारण ये प्रमथन स्वभाव वाली इन्द्रियाँ यत्न करते हुए बुद्धिमान पुरुष के मन को भी बलात् हर लेती हैं ॥2-60॥

जब ये प्रमथन स्वभाव वाली इन्द्रियाँ बुद्धिमान पुरुष के मन को भी बलात् हर लेती हैं,

अर्थात पहले बलात्कारी के मन और बुध्दि पर ये इद्रियाँ बलात्कार करती हैँ...

[इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि- ये सब इसके वासस्थान कहे जाते हैं। यह काम (Sex) इन मन, बुद्धि और इन्द्रियों द्वारा ही ज्ञान को आच्छादित करके जीवात्मा को मोहित करता है। ॥ गिता 3-40॥ ]

...और ये सब होता हैँ गलत सोच से...

 

 

बलात्कार पर विरोध जताना, क्या एक दिखावा भर हैँ...?

 

जब बलात्कार होता है तब सडको पर मार्च निकाला जाता हैँ,

We Want Justice  जैसे नारे चलते हैँ...

पर... क्या फायदा जब कोई नयी फिल्म आती हैँ तो बिना Hot Bold Scences वाली फिल्म Floph करार दी जाती हैँ ।

कोई भी Director अपनी फिल्म मेँ Hotness चाहता हैँ, क्योँ की लोगो की खराब मानसिकता को यही पसंद हैँ ।

पहलेँ के जमाने मेँ छोटे बच्चो को Blue Flim देखने को नहीँ मिलती थी,

और आज कल तो पांचवी का बच्चा भी 20 रुपये वाला Net Pack डालकर सैकडो MMS देखता हैँ.

और फिर विषयासक्त होकर लडकीयोँ के Privete Parts को हमेशा घुरता रहता हैँ ।

 

स्कुलो में India is my country. All Indians are my brothers and sisters कहने के बाद किसी लड़की को ''माल'' कहने वालो को शरम आणि चाहिए...

शहरो मेँ जब कोई माँ अपने लडकी को School भेजती हैँ तो उसके मन एक डर सताता हैँ...

अथवा कोई लडकी Tuition से घर जल्दी नहीँ आती तो उसका पिता दरवाजे के तरफ ताकता रहता हैँ...

या कभी कभी तो भाई खुद College Drop कर देता हैँ...

पर मन का डर कभी भी खतम नहीँ होता...

ऐसा लगता कब कोई अनहोनी घटना ना घट जाये ...

 

क्यो ?  दुसरोँ के बहनोँ को "माल" कहने वाले लडके कभी अपने बहन को किसी द्वारा 'माल' कहने पर चिड जाते हैँ...

 

National Crime Records Bureau (NCRB) के 2014 मेँ हुये Count के मुताबिक हर दिन भारत मेँ 93 महिलाओँ, लडकीयोँ अथवा बच्चीयोँ से बलात्कार होता हैँ...

जो बलात्कार का आकडा 2012 मेँ 24,923 था, वह 2013 बढकर 33,707 होँ गया...

भारत मेँ 2009 - 2011 के बिच 68,000 से ज्यादा रेप हुयेँ है, लेकिन सिर्फ 16,000 अपराधी पकडे गये...

भारत मेँ 4 दिन की बच्चीसे लेकर 90 साल की बुजुर्ग महीला के साथ तक रेप हुये हैँ...

तथा साढे 17 साल के बलात्कारी की उमर देख कर उसे सिर्फ 3 साल की सजा दी जाती हैँ (निर्भया 2013)... और फिर भी हम कहते हैँ की मेरा भारत महान हैँ...

जागिये अब नहीँ जागेँगे तो कहीँ वह अनहोनी भविष्य मेँ आप के बेटी के साथ ना होँ...

और हां, लडीयोँको मर्यादा सिखाने से अच्छा हैँ आप अपने लडको को अच्छे संस्कार दे क्योँकी नियत कितनी भी अच्छी क्योँ न हो दुनिया आपको आपके दिखावे से ही जानती हैँ, और दिखावा कितना भी अच्छा क्योँ न हो भगवान आपको आपकी नियत से जानता हैँ ।…….

जिन्हे सचमुच बलात्कार मुक्त भारत चाहीये वह लोग क्यो नहीँ Porn Nude Internet का बहिश्कार करते, क्यो ऐसी फिल्मे और B,C Grede फिल्मो का बहिश्कार नहीँ करतेँ ? कोइ भी अपने Girl Friend का MMS बनाकर Web Site पर डालता है, तो कोई Facebook Page पर Nude Girls की तस्विरे डालकर भद्धी Comment करता हैँ । क्यो कोई सरकार या न्याय व्यवस्था इन सब पर भारत मेँ Ban नहीँ करता ?

जागिये, और बहिश्कार किजिये इन Porn, Nude और Hot Bollywood तथा Porn Nude Internet का ।

सोच बदलो देश बदलेगा,

 

अकेले नरेँद्र मोदी क्या क्या करेँगेँ ।

 





 

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14 Feb 2014